मोज़े

 

 

मैं सोचता हूँ,
जब मोज़े बनाए होंगे किसी ने,
क्या एक ही रंग के रंगे होंगे दोनों?

पाँव का सही मोज़ा
कैसे पहचाना होगा उसने?

लगे महीने या बरस
समझने को अंतर,
क्या बराबर रहे होंगे दोनों?

या बस
साथ रख देने मात्र से,
जोड़ा मान लिया गया होगा?

कभी बायाँ
दाएँ से थक जाता होगा,
कभी दायाँ
बाएँ की गर्मी सह लेता होगा।

एक में छेद उभरा होगा पहले,
दूसरा चुपचाप
इज़्ज़त निभाता रहा होगा।

यूँ तो
काम का नहीं रहता दूसरा,
एक के
रेशे फटने के बाद,

मगर कभी किसी ने सुनी है,
उनकी बिछड़ी जोड़ी की आह?

मैं सोचता हूँ,
जब मोज़े बनाए होंगे किसी ने,
क्या एक ही जैसे रहे होंगे दोनों?

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